Description
A modern Hindi classic of great merit, based on the life of Sant Tulsidas.
“मानस का हंस” प्रख्यात लेखक अमृतलाल नागर का प्रतिष्ठित बृहद् उपन्यास है। इसमें पहली बार व्यापक कैनवास पर “रामचरितमानस” के लोकप्रिय लेखक गोस्वामी तुलसीदास के जीवन को आधार बनाकर कथा रची गई है, जो विलक्षण के रूप से प्रेरक, ग्यानवर्धक और पठनीय है। इस उपन्यास में तुलसीदास का जो स्वरूप चित्रित किया गया है, वह एक सहज मानव का रूप है। यही कारण है कि “मानस का हंस” हिन्दी उपन्यासों में ‘क्लासिक’ का सम्मान पा चुका है और हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधी माना जाता है। नागरजी ने इसे गहरे अध्ययन और मंथन के पशचात् अपने विशिष्ट लखनवी अन्दाज़ में लिखा है। बृहद होन् पर भी यह उपन्यास अपनी रोचकता में अप्रतिम है।





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